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| उनकी कथाओ मे से एक। |
डॉ. ए. पी. जे. अबदुल कलाम के ज़िन्दगी से ली गई ५ प्रेरक एवं प्रेरणादायक उपदेश।
#1 अपने आप पर विश्वास करें
ए. पी. जे. अब्दुल कलाम का जन्म रामेशवरम नामक गांव में हुआ था। उनके पिता एक नौका-चालक थे पर भी उन्हें अपने आप पर और अपने सपनो पर पूरा विस्वाश था। . उन्होंने अपने बचपन में अपनी पढाई जारी रखने के लिए घर-घर जाकर अख़बार भी बाटे थे। उनकी इस लगन ने उन्हें भारत की सबसे बड़ी सइंसदान (वैग्यानिक) और राष्ट्रपति बना दिया। हमें उनकी ज़िन्दगी के इस सफर से यह पता चलता है की,
"अगर हमे अपने आप पर भरोषा हो तो इस बात से कोई फर्क नहीं पड़ता की हम किसी छोटे गांव या सहर में रेहते है , बस हमारी सोच और सपने छोटे नहीं होने चाहिए। "
#2 अडिग रहे
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| जब उन्हें माननीय उपाधि प्राप्त हुई। |
डॉ. ए. पी. जे. अब्दुल कलाम। आप बखूबी जानते है की उनके नाम के आगे डॉ. लगाया जाता है, और वे एक बहोत अच्छे सइंसदान या वैज्ञानिक भी थे, पर, क्या आप यह जानते है ? उनके पास कोई भी नियमित उपाधि नहीं थी। यहाँ तक की एक बार जब उन्होंने इसके लिए आवेदन किया था तब उस आवेदन को अस्वीकार कर दिया गया था। पर आगे चलकर उनके मेहनत और लगन एवं योगदान के वजह से उन्हें १ नहीं, २ नहीं , या ३ भी नहीं बल्कि ४० विश्वविद्यालयों से माननीय डॉक्टरेट की उपाधि दी गई। इसका मतलब,
"अगर हमारे प्रकृति में हमारे काम के प्रति अडिगता हो तो देर से ही सही पर कामयाबी मिल ही जाती है। "
#3 अपने सपनो को कभी न त्यागे
भारत के अग्नि और पृथ्वी मिसाइल्स की कामयाबी को उनके नाम से जोड़ा जाता है। पर, क्या आप जानते हैं ? ये दोनों ही मिसाइल्स एक असफल प्रयास थे। उनकी ज़िन्दगी में भी ऐसी और कई सारी असफलताएं' आयी. जब वे असफल हो गए थे तो लोग उनपर हँसे, उनकी आलोचना की गयी और उनके काबिलयत पर भी शक किया गया। पर आख़िरकार कुछ समय बाद उनका यह काम भी सफल हो गया, और उन्होंने एक बार फिर से दिखा दिया की,
"जितने वाले और उपलब्धि हाशिल करने वाले यह जानते है की असफलता ,असल में सफलता के सफर का एक हिस्सा है। अगर कुछ ज़रूरी है तोह वह यह है की आप को कभी भी असफलता के कारण रुकना नहीं चाहिए। "
#4 बड़े सपने बुने , बड़ी सोच रखे
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| जब उन्होंने "सुपरसोनिक " लड़ाकू विमान को चलाया। |
"ये ज़रूरी नहीं की हर बड़े सपने सफल हो जाय ,पर बड़ी सोच रखने पर आपकी मेहनत और लगन बड़ा परिणाम देती है। "
उनके बहोत से सपनो में से एक सपना यह भी था, वे भारतीय वायु सेना के पायलट बनना चाहते थे और उन्होंने इसके लिए इम्तिहान भी दिया था पर वे सिर्फ एक स्थान से चूक गए थे। फिर वे डी.र.डी.ओ. (DRDO) में चले गए और एक बहोत बड़े वैज्ञानिक बने जिन्होंने हमे हमारे देश को काफी फायदा पहुचाया है। पर बाद में २००२ में जब वे ७४ साल के थे तब उन्होंने अपना यह अधूरा सपना भी पूरा कर दिखाया उन्होंने भारत के लड़ाकू विमान "सुपरसोनिक" को एक सहयोगी पायलट के रूप में करीब ४० मिनट तक आसमान में उड़ाया और ये भारत एकलौते राष्ट्रपति बने जिन्होंने लड़ाकू विमान चलाया हो।
वे सिर्फ ज़िन्दगी में ही सफल नहीं हुए बल्कि, उन्होंने लोगों का दिल भी जीताआखिर इसी को ही सम्पूर्ण सफलता या सच्ची सफलता कहा जा सकता है। उनके इसी सामान्या प्रकृति और रवैये के वजह से उन्हें "लोगों के राष्ट्रपति (The People's President)" कहा जाता था। उन्होंने बिल्कुल साधारण जीवन व्यतीत किया, यहाँ तक की विलासमय "राष्ट्रपति भवन" में भी उन्होंने सामान्य ज़िन्दगी गुजारा। और क्योंकि अब उनका ख्याल भारत सरकार रखती उन्होंने अपनी सारी जमापूंजी दान पुण्य के लिए दान कर दी।
एक बार उन्हें आई. आई. टी. (बी. एच. यु), वाराणसी के एक दीक्षांत समारोह में मुख्या अतिथि के रूप में बुलाया गया था। वहां ५ कुर्शियाँ रखी गयी थी जिनमे से बिच में एक बड़ी और थोड़ी विशेष तरह की कुर्सी राखी गयी थी, जो की दूसरी कुर्सियो के मुकाबले थोड़ी बड़ी थी और यह कुर्शी उनके लिए ही रखी गयी थी। । जब कलाम जी ने यह देखा तो उन्होंने उस कुर्सी पर बैठने से इंकार कर दिया और उन्होंने वहां के कुलपति को उस कुर्शी पर बैठने के लिए आमंत्रित किया, जाहिर सी बात है की कुलपति यह नहीं कर सकते थे तो उसी वक़्त लोगों के राष्ट्रपति के लिए दूसरी सामान्य कुर्सी लायी गयी।
"हर कामयाब सफर का रास्ता एक सपने से सुरु होता है,और बड़ी कामयाबी का सफर बड़े सपने से सुरु होता है। "
#5 हमेशा सब के लिए सामान बने रहे
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| लोगो के राष्ट्रपति प्राथमिक विद्यालय के छात्रों के साथ। |
वे सिर्फ ज़िन्दगी में ही सफल नहीं हुए बल्कि, उन्होंने लोगों का दिल भी जीताआखिर इसी को ही सम्पूर्ण सफलता या सच्ची सफलता कहा जा सकता है। उनके इसी सामान्या प्रकृति और रवैये के वजह से उन्हें "लोगों के राष्ट्रपति (The People's President)" कहा जाता था। उन्होंने बिल्कुल साधारण जीवन व्यतीत किया, यहाँ तक की विलासमय "राष्ट्रपति भवन" में भी उन्होंने सामान्य ज़िन्दगी गुजारा। और क्योंकि अब उनका ख्याल भारत सरकार रखती उन्होंने अपनी सारी जमापूंजी दान पुण्य के लिए दान कर दी।
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| विशेष कुर्शी का साधारण कुर्शी के साथ बदलाव। |
एक बार उन्हें आई. आई. टी. (बी. एच. यु), वाराणसी के एक दीक्षांत समारोह में मुख्या अतिथि के रूप में बुलाया गया था। वहां ५ कुर्शियाँ रखी गयी थी जिनमे से बिच में एक बड़ी और थोड़ी विशेष तरह की कुर्सी राखी गयी थी, जो की दूसरी कुर्सियो के मुकाबले थोड़ी बड़ी थी और यह कुर्शी उनके लिए ही रखी गयी थी। । जब कलाम जी ने यह देखा तो उन्होंने उस कुर्सी पर बैठने से इंकार कर दिया और उन्होंने वहां के कुलपति को उस कुर्शी पर बैठने के लिए आमंत्रित किया, जाहिर सी बात है की कुलपति यह नहीं कर सकते थे तो उसी वक़्त लोगों के राष्ट्रपति के लिए दूसरी सामान्य कुर्सी लायी गयी।
जब वे पेहली बार "राज भवन" गए तो उस वक़्त वे किसी भी बड़े दिग्गज को भी वहां आमंत्रित कर सकते थे...
...लेकिन उन्होंने राष्ट्रपति पद के उम्मीदवार के रूप में एक मोची और एक छोटे से लॉज (किराये वाला घर) के एक मालिक को आमंत्रित किया।
उनके जीवन में ऐसी कई घटनाएँ है जो हमे यह बताती है की,
...लेकिन उन्होंने राष्ट्रपति पद के उम्मीदवार के रूप में एक मोची और एक छोटे से लॉज (किराये वाला घर) के एक मालिक को आमंत्रित किया।
उनके जीवन में ऐसी कई घटनाएँ है जो हमे यह बताती है की,
"एक पतंग तभी ऊँचा उड़ सकती है जब उसकी डोर जमीन से जुडी हो।"
This post is a translation from English to Hindi. The original post is in English and its available here in this link: http://motivesta.blogspot.in/2016/11/5-motivational-life-lessons-from-dr-apj-abdul-kalam.html
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